राष्ट्रीय स्वदेशी महोत्सव, चित्तौड़गढ़ में ‘नीर अमृत’ की अनूठी पहल — भारत में पहली बार सामुदायिक मेले में कांच की बोतलों से पानी व्यवस्था
राष्ट्रीय स्वदेशी महोत्सव में इस वर्ष पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक और अभिनव पहल देखने को मिली।
चित्तौड़गढ़ | राष्ट्रीय स्वदेशी महोत्सव, चित्तौड़गढ़ में इस वर्ष पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक और अभिनव पहल देखने को मिली। राजस्थान के अतिथियों की उपस्थिति में उद्घाटित इस महोत्सव में पहली बार पूरे आयोजन में अतिथियों और समुदाय को कांच की बोतलों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया गया।
23 से 28 दिसंबर तक आयोजित राष्ट्रीय स्वदेशी महोत्सव में देशभर से आए 150 से अधिक स्टॉलों ने कला, शिल्प और स्वदेशी उत्पादों का प्रदर्शन किया। इस बड़े जनसमूह वाले आयोजन में ‘नीर अमृत’ द्वारा प्रतिदिन औसतन 2000 से अधिक कांच की बोतलों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया गया। यदि यही मात्रा प्लास्टिक बोतलों में दी जाती, तो प्रतिदिन लगभग 5000 प्लास्टिक बोतलें कचरे में जुड़तीं। इस प्रकार महोत्सव के छह दिनों में करीब 25,000 प्लास्टिक बोतलों के उपयोग से बचाव हुआ, जो सीधे तौर पर धरती और पर्यावरण की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान है।
इस पहल से न केवल प्लास्टिक प्रदूषण में कमी आई, बल्कि आगंतुकों को कम लागत पर क्षारीय (Alkaline) पानी भी उपलब्ध हुआ, जिससे लोगों के दैनिक खर्च में भी बचत हुई। यह मॉडल पर्यावरण और आमजन—दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध हुआ।
‘नीर अमृत’ पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक बोतल-मुक्त सार्वजनिक स्थलों को बढ़ावा देने के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रहा है। ‘नीर अमृत’ और ‘श्रिष्टि’ के संयुक्त प्रयासों से गुजरात सचिवालय तथा तिरुपति मंदिर ट्रस्ट को पूरी तरह प्लास्टिक बोतल-मुक्त बनाया गया है। ये दोनों पहल आज भी सफलतापूर्वक और आत्मनिर्भर रूप से संचालित हो रही हैं। इन परियोजनाओं के लिए एकमुश्त निवेश और सहयोग गुजरात वन एवं पर्यावरण विभाग तथा तिरुपति मंदिर ट्रस्ट द्वारा प्रदान किया गया।
नीर अमृत वर्तमान में राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश—तीन राज्यों में आरओ हब-एंड-स्पोक मॉडल के माध्यम से कार्य कर रहा है, जिससे 1 लाख से अधिक परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। यह मॉडल भी अपने आप में अनूठा है, जिसमें नीर अमृत द्वारा आय का एक निश्चित प्रतिशत ग्राम पंचायतों के साथ साझा किया जाता है, ताकि उसे गांवों के विकास कार्यों में लगाया जा सके—यह एक जिम्मेदार और सहभागी संगठन का उदाहरण है।
राष्ट्रीय स्वदेशी महोत्सव के प्रबंधन द्वारा प्लास्टिक बोतलों को हटाकर कांच की बोतलों को अपनाने जैसे दूरदर्शी कदम की व्यापक सराहना की जा रही है। यह पहल पर्यटन और सामुदायिक आयोजनों को प्लास्टिक-मुक्त बनाने की दिशा में एक प्रेरक मॉडल प्रस्तुत करती है, जिसे देशभर में अपनाया जा सकता है।
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