श्रीमद् भागवत से भक्ति ज्ञान वैराग्य तत्व की प्राप्ति संभव – संत दिग्विजयराम
श्रीमद् भागवत से भक्ति ज्ञान वैराग्य तत्व की प्राप्ति संभव – संत दिग्विजयराम*.
श्रीमद् भागवत से भक्ति ज्ञान वैराग्य तत्व की प्राप्ति संभव – संत दिग्विजयराम
विजयपुर राम स्नेही सम्प्रदाय के संत दिग्विजयराम जी महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत भक्ति ज्ञान वैराग्य एवं तत्व का मर्म समझाकर जीवन पापों से मुक्ति के साथ मोक्ष प्रदान करने का पावन ग्रंथ हैं। संत दिग्विजयराम धर्म नगरी विजयपुर में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद भागवत कथा महोत्सव के प्रथम दिवस को व्यासपीठ से कथा रसामृतपान करवा रहे थे। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत से ही राजा परिक्षित के सभी भ्रम दूर हो सके। उन्होंने बताया कि भागवत वक्ता वैरागी एवं श्रोता प्रभु अनुरागी हो तभी भक्ति सरिता प्रवाहित होने का आनंद मिल सकता हैं। उन्होंने भागवत के प्रथम श्लोक का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान का सद् चित रूप हैं, जिनके दर्शन मात्र से दैहिक सुख संभव हैं। उन्होंने भगवान शिव द्वारा पार्वती को अमर कथा श्रवण कराने के दौरान शुक सूत द्वारा श्रवण करने पर शिव द्वारा क्रोधित होकर उसे मारने का उद्धम करने तथा शुक सूत द्वारा वेद व्यास की भार्या के मुख के माध्यम से गर्भस्थ होकर द्वादश वर्ष उपरांत बाहर आते ही वनवास जाकर भगवत भक्ति करने का मार्मिक वर्णन करने के साथ ही सूत जी द्वारा 88 हजार ऋषियों को कथा श्रवण कराते हुए कहा कि जीव के दो शत्रु नींद और निंदा हैं, जिन पर विजय पाने से ही प्रभु भक्ति और मोक्ष प्राप्ति संभव हैं। उन्होंने भक्ति के दो पुत्र ज्ञान और वैराग्य की चर्चा करते हुए कहा कि सनद कुमारों द्वारा भागवत श्रवण कराने से ज्ञान और वैराग्य वृद्धावस्था से पुन: युवा बन पाए। उन्होंने आत्मदेव धूंधूंली और गोकर्ण का संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि गोकर्ण के ज्ञान से ही धूंधूकारी प्रेत योनी से मुक्त हो सका। इस दौरान भक्तिमय भजनों से समूचा कथा मंडप भक्ति सरोवर में हिलोरे लेता रहा। प्रारंभ में मुंदड़ा परिवार की ओर से व्यासपीठ पर विराजित संत दिग्विजयराम जी का आत्मिक स्वागत एवं अभिनन्दन करने के साथ ही मुख्य श्रोता के रूप में विराजित ठाकुर श्रीनाथ जी की पूजा अर्चना करते हुए व्यासपीठ का पूजन किया गया।आयोजक परिवार के बंशी लाल, दामोदर,केलाश ,ओमप्रकाश ,कमल,संदीप अंकित एवं पूर्व राज्य मंत्री श्री सुरेंद्रसिंह जाड़ावत ,राव नरेंद्र सिंह सरपंच श्री श्याम जी शर्मा ने व्यास पीठ से आशिर्वाद लिया । प्रथम दिवस की कथा विश्राम पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ की आरती की।
भव्य शोभायात्रा एवं कलश यात्रा ने धर्म नगरी विजयपुर को निरूपित किया भक्तिमय
धर्मनगरी मे आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के प्रथम दिवस पर नृसिंह मंदिर से कथा स्थल तक निकाली गई जिसमें हजारों की संख्या में भक्त लोग सामिल हुए l शोभायात्रा एवं कलश यात्रा ने धर्म नगरी को भक्तिमय निरूपित करने में कोई कोर कसर नहीं रखी एसा लगा जैसे पूरे विजयपुर की गलियां वृंदावन बन गयी l शोभायात्रा एवं कलशयात्रा का पूरे मार्ग में पुष्प वर्षा कर आत्मिक स्वागत किया गया । शोभा यात्रा का मुख्य आकर्षण 65 गांव से आई हरिबोल प्रभात फेरियां थी जिसमें ग्रामीण अंचल से आए भक्तगण भजन- कीर्तन करते , नाचते- गाते , चल रहे थे जगह जगह ग्राम वासियों द्वारा पेयजल, ठंडा , कुल्फी आदि खिलाकर स्वागत किया । शोभायात्रा में भगवान लक्ष्मी नाथ व भगवान नृसिंह नाथ का बेवान के साथ सुसज्जित बग्गी में रामस्नेही संप्रदाय के संत श्री दिग्विजय राम जी विराजमान थे l
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