अखिल भारतीय साहित्य परिषद निंबाहेड़ा ने मनाया भारतीय भाषा दिवस

अखिल भारतीय साहित्य परिषद निंबाहेड़ा इकाई द्वारा भारतीय भाषा दिवस के उपलक्ष्य में “भारतीय भाषाओं का सांस्कृतिक सामर्थ्य” विषय पर एक विचारोत्तेजक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

Dec 18, 2025 - 16:10
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अखिल भारतीय साहित्य परिषद निंबाहेड़ा ने मनाया भारतीय भाषा दिवस

निंबाहेड़ा।अखिल भारतीय साहित्य परिषद निंबाहेड़ा इकाई द्वारा भारतीय भाषा दिवस के उपलक्ष्य में “भारतीय भाषाओं का सांस्कृतिक सामर्थ्य” विषय पर एक विचारोत्तेजक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की मुख्य अतिथि वर्षा कृपलानी, विशिष्ट अतिथि साहित्यकार रतनलाल मेनारिया ‘नीर’ तथा अध्यक्षता जिलाध्यक्ष डॉ. बालमुकुंद भट्ट ‘सागर’ ने की। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता क्षेत्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रविंद्र कुमार उपाध्याय रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। परिषद गीत का सुंदर प्रस्तुतीकरण सुशीला माहेश्वरी ने किया। अतिथियों का स्वागत एवं परिचय इकाई अध्यक्ष सत्यनारायण जोशी ने कराया। संगोष्ठी में विभिन्न भारतीय भाषाओं के साहित्यकारों ने अपनी बात अपनी-अपनी भाषा में रखते हुए भाषाई विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि को रेखांकित किया।

मुख्य अतिथि वर्षा कृपलानी ने अपने उद्बोधन में कहा कि हम प्रतिदिन राष्ट्रगान जन-गण-मन में पंजाब के साथ सिंध का भी स्मरण करते हैं। भले ही आज सिंध भारत के भूगोल का हिस्सा नहीं है, लेकिन हमारी सिंधी भाषा और संस्कृति ने हमें आज भी आपस में जोड़े रखा है। विशिष्ट अतिथि रतनलाल मेनारिया ‘नीर’ ने भारतीय भाषाओं के महत्व और उनकी समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. बालमुकुंद भट्ट ‘सागर’ ने हिंदी भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि हिंदी देश की सबसे सरल, सहज और सर्वग्राह्य भाषा है, जो पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने का कार्य कर रही है। मुख्य वक्ता डॉ. रविंद्र कुमार उपाध्याय ने कहा कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। विभिन्न भाषाएं और संस्कृतियां मिलकर भारत का निर्माण करती हैं। भारत की सभी भाषाएं हमारी अपनी भाषाएं हैं और सभी के प्रति समान प्रेम एवं सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिषद द्वारा देशभर में भारतीय भाषा दिवस पर ऐसे आयोजनों की आवश्यकता है।

संगोष्ठी में मैथिली कवि पंकज सरकार ने मैथिली भाषा में अपने उद्बोधन के साथ प्रसिद्ध गीत “हे कागा आबह हम्मर द्वार…” प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर किया। जयेश कुमार बकरानिया ने गुजराती भाषा में अपनी बात रखते हुए मधुर गुजराती गीत प्रस्तुत किया। सुशीला माहेश्वरी ने संस्कृत भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए संस्कृत गीत प्रस्तुत किया। श्यामा सोलंकी एवं दीपिका सत्यदीप ने भी अपनी-अपनी रचनाओं का पाठ किया।

कार्यक्रम का कुशल संचालन तृप्ति कुमावत ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन विभाग संयोजक राजेश गांधी ने किया। इस अवसर पर तरुणा गोखरू, हंसा स्वर्णकार, बालमुकुंद प्रधान, फतेह सिंह, दिनेश चंद्र धींग, घनश्याम तोसावड़ा, पुष्कर मेनारिया, राजकुमार चपलोत, कमलेश जैन, शशि कुमार जोशी, चंद्रप्रकाश जोशी, परसराम कुमावत, सीमा शर्मा सहित अनेक साहित्यप्रेमी एवं परिषद के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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Avinash chaturvedi

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