राजनीति गलियारे से सियासी चर्चा..नेताओं की सियासी चाल,जिला भाजपा में फिर बवाल ?
भाजपा जिलाध्यक्ष की ओर से जारी चित्तौडग़ढ़, बस्सी, घोसुण्डा, चंदेरिया, सावा और भदेसर मंडल के अध्यक्षों की घोषणा ने एक बार फिर जिला भाजपा संगठन में बवाल खड़ा कर दिया। अब सांसद सी.पी. जोशी के समर्थकों को यह ना तो उगलते बन रहा है और ना ही निगलते बन रहा है।
सबसे बडा सवाल...क्या वास्तव में सांसदजी को कुछ नहीं था पता?
क्या विधायकजी का पार्टी में हो गया सांसदजी से बडा कद ?
चित्तौडग़ढ़ भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष रतन गाडरी ने लम्बे समय बाद चित्तौडग़ढ़ विधानसभा के छह मंडल अध्यक्षों की घोषणा गत 18 जनवरी की देर रात की थी। इस सूची में जो ६ मंडल अध्यक्ष बने इनमें से 5 चित्तौडग़ढ़ विधायक चन्द्रभान सिंह खेमे से थे। इनमें से कुछ नाम तो वह थे जब चन्द्रभान सिंह आक्या का टिकट कटा और तत्कालिन प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सी. पी. जोशी के निर्देश पर इसमें पूर्व मंडल अध्यक्षों को पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ रहने के कारण हटाया गया था। लेकिन भाजपा संगठन के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी की समझाइश के बाद सांसद सी. पी. जोशी एवं विधायक चन्द्रभान सिंह में एका हुआ और करीब ढाई साल बाद यह एक साथ नजर आने लगे। इसके बाद से ही दोनों के समर्थकों में सदैव ऊहापोह की स्थिति बनी रही। धीरे-धीरे हालात सामान्य हो ही रहे थे और 18 जनवरी की रात को भाजपा जिलाध्यक्ष की ओर से जारी चित्तौडग़ढ़, बस्सी, घोसुण्डा, चंदेरिया, सावा और भदेसर मंडल के अध्यक्षों की घोषणा ने एक बार फिर जिला भाजपा संगठन में बवाल खड़ा कर दिया। अब सांसद सी.पी. जोशी के समर्थकों को यह ना तो उगलते बन रहा है और ना ही निगलते बन रहा है। जब विरोध के धीमेे स्वर मुखर होने लगे तो 22 जनवरी को नेताजी को कुछ सालों पूर्व एक भूखण्ड के मामले में आरोपों के घेरे में खड़े करने वाले युवा नेताजी ने पूरे असतुंष्ठ खेमे को अपने घर पर बुला एक बैठक भी कर ली। उस बैठक में स्वयं सांसद सी. पी. जोशी, जिला संगठन के पदाधिकारी, पूर्व पार्षद, पंचायती राज से जुडे नेताजी, निवर्तमान मंडल अध्यक्ष सहित करीब साठ से सत्तर पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। वहां पर सब ने मंडल अध्यक्षों की घोषणा पर सवाल खड़े किए तो सांसद सी.पी.जोशी ने यह कह कर पल्ला झाड लिया कि उन्हें इसकी खबर ही नहीं लगी। यह बात जब आम आदमी के गले नहीं उतर रही तो फिर भाजपा संगठन में वर्षो से काम करने वालों के गले कैसे उतर सकती थी। इसी के चलते पंचायती राज वाले नेताजी को भी बीएमएस के हमले का जवाब देने का मौका मिल गया और उन्होंने तुरंत ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को फोन लगाया और जैसे ही यह पता लगा कि वे उदयपुर प्रवास पर है तो वह तीस चालीस लोगों के साथ उदयपुर पहुंच गए। प्रदेशाध्यक्ष से जिलाध्यक्ष रतन गाडरी की घोषणा पर जब आपत्ति जताई तो उन्होंने यह कहते हुए पल्ला जाडा कि यह तो सब जिलाध्यक्ष, सांसद एवं विधायक की सहमति से हुआ है और दिल्ली की यात्रा इसकी गवाह है। जहां पर जिलाध्यक्षजी के साथ सांसद जी के घर पर विधायकजी से भी मुलाकात हुई थी। फिर भी अगर आपत्ती है तो इसे होल्ड पर डालने का आश्वासन दे दिया। इसके बाद भी जब कोई समाधान निकलता नहीं दिखा तो असतुंष्ट खेमे २९ जनवरी तक का अल्टीमेटम दिया इसके बाद एक बार फिर भाजपा जिला संगठन किस मौड पर होगा यह समझा जा सकता है। लेकिन इस सब के बीच यह सबसे बड़ा सवाल है कि यह दो मजे हुए नेताओं की सियासी चाल है या फिर वास्तव में सांसद सी.पी.जोशी को खबर ही नहीं थी।
तो क्या नियमों को ताक में रखकर हुई घोषणा ?
चर्चा तो यह भी है कि छह ही मंडल अध्यक्षों की घोषणा संगठन की नियमावली से परे जाकर की गई है। इसमें सबसे पहला मापदण्ड यह है कि मंडल अध्यक्ष ४५ साल से अधिक का नहीं होगा चित्तौडग़ढ़ में सुदर्शन रामपुरिया की उम्र 57 से 58 साल बताई जा रही है उन्हें इस पद पर बैठाया गया है, बस्सी में भंवर सिंह की उम 50 वर्ष बताई जा रही है तो बाकी अन्य भी ४५ से अधिक के है। वहीं दूसरा नियम संगठन में सक्रिय भूमिका एवं पुराना अनुभव होना चाहिए लेकिन एक व्यक्ति तो इस मामले में पूरी तरह से शून्य है। संगठन सरंचना अभियान में पार्टी के निर्देश थे पार्टी से निष्कासित लोगों को पार्टी में लेकर पार्टी की कार्यकारिणी में शामिल किया जा सकता है लेकिन मुखिया नहीं बनाया जाए। इसमें उम्मीद लगाए बैठे कई युवा नेताओं की राजनीतिक हत्या भी हो गई।
What's Your Reaction?