मेवाड़ विश्वविद्यालय में मेवाड़ संग्रहालय का उद्घाटन
चित्तौडग़ढ़. मेवाड़ विश्वविद्यालय गंगरार परिसर में रविवार को मेवाड़ की गौरवशाली ऐतिहासिक सांस्कृतिक एवं परंपरागत विरासत के संरक्षण के उद्देश्य से स्थापित मेवाड़ संग्रहालय का उद्घाटन सम्पन्न हुआ। इस संग्रहालय का उद्घाटन मेवाड़ के पूर्व राजघराने के वंशज महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़ ने किय।
एकलिंग दीवान मेवाड़ विश्वराज सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजन
चित्तौडग़ढ़. मेवाड़ विश्वविद्यालय गंगरार परिसर में रविवार को मेवाड़ की गौरवशाली ऐतिहासिक सांस्कृतिक एवं परंपरागत विरासत के संरक्षण के उद्देश्य से स्थापित मेवाड़ संग्रहालय का उद्घाटन सम्पन्न हुआ। इस संग्रहालय का उद्घाटन मेवाड़ के पूर्व राजघराने के वंशज महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़ ने किय।
कार्यक्रम संयोजक एवं एसोसिएट प्रोफेसर डा. हेमेन्द्र सिंह सारंगदेवोत ने बताया कि मेवाड़ संग्रहालय की स्थापना का उद्देश्य चित्तौडग़ढ़ एवं मेवाड़ क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक परंपराओं, शौर्यगाथाओं, लोकसंस्कृति, कला एवं विरासत को संजोकर भावी पीढ़ी तक पहुँचाना है। यह परियोजना मेवाड़ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं चेयरमैन डा. अशोक कुमार गदिया का दीर्घकालीन स्वप्न रही है, जिस पर विगत लगभग दस वर्षों से निरंतर कार्य किया जा रहा था।
समारोह के मुख्य वक्ता प्रख्यात साहित्यकार राव सुरेंद्र सिंह मृत्युंजय एवं मेवाड़ी कवि अमृत कुमावत ने उद्बोधन में मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास, त्याग, बलिदान एवं सांस्कृतिक चेतना पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर वरिष्ठ इतिहासकार मंगल सिंह राव, तनवीर सिंह सारंगदेवोत एवं नरेंद्र सिंह पंवार को उनके उल्लेखनीय ऐतिहासिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के प्रथम चरण में अतिथियों का स्वागत बांसी ठिकाना शैली में किया गया। एन एस एस कैडेट्स द्वारा बैंड के साथ अगवानी, दरबार से पारंपरिक लवाज़म छत्री, चंवर, नौबतखाना वाद्ययंत्रों की गूंज राजस्थानी घूमर नृत्य एवं पारंपरिक वेशभूषा में सजी बालिकाओं द्वारा संग्रहालय तक भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
द्वितीय चरण में महाराणा मेवाड़ विश्वराज सिंह द्वारा नौबतखाना संगीत के मध्य उद्घाटन नामपट्टिकाष् का अनावरण एवं संग्रहालय का उद्घाटन मौली बंधन सहित गुलाब की पंखुडय़िों की वर्षा के साथ किया गया। इस अवसर पर संग्रहालय कैटलॉग का विमोचन भी किया गया।
प्रोफेसर डॉ. चित्रलेखा सिंह द्वारा संग्रहालय की विभिन्न दीर्घाओं का अवलोकन कराया गया, जिसमें अतिथियों ने मेवाड़ के इतिहास, संस्कृति एवं विरासत से संबंधित दुर्लभ सामग्री का अवलोकन किया।
महाराणा प्रताप सभागार में आयोजित अभिनंदन समारोह में दीप प्रज्ज्वलन एवं कुलगीत के पश्चात महाराणा मेवाड़ विश्वराज सिंह का पारंपरिक अभिनंदन किया गया। स्वागत एवं अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलाधिपति एवं चेयरमैन डॉ.अशोक कुमार गदिया ने मेवाड़ विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास, शौर्य, बलिदान एवं सांस्कृतिक विरासत पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ.साथ अपनी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने के लिए प्रतिबद्ध है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत शास्त्रीय नृत्य,गणेश वंदना, देशभक्ति गीत, राजस्थानी घूमर, अंतरराष्ट्रीय छात्राओं द्वारा राजस्थानी नृत्य एवं काव्यपाठ की प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दी गईं।
मेवाड़ विश्वराज सिंह ने मेवाड़ संग्रहालय को सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण एवं प्रचार.प्रसार का सशक्त माध्यम बताते हुए इसे भावी पीढ़ी के लिए इतिहास एवं संस्कृति का जीवंत केंद्र बताया।कुलाधिपति डॉ. अशोक कुमार गदिया ने भी विचार व्यक्त किए। कुलपति प्रो. डॉ. आलोक मिश्रा ने आभार जताया।
समारोह में मेवाड़ एजुकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष गोविन्द लाल गदिया, बोर्ड ऑफ मेंबर्स राधाकृष्णन गदिया, कमला बाई गदिया, ओएसडी एच. विधानी, रजिस्ट्रार डा. चंडिकादित्य कुमावत, डीन एकेडमिक प्रो. डा. दीपक व्यासए ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट्स के डायरेक्टर हरीश गुरनानी, डिप्टी रजिस्ट्रार डा. दीप्ति शास्त्री आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉण् वंदना चुंडावत ने किया।
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