जनचेतना मंच चित्तौड़ द्वारा सुरक्षित भारत विषय पर व्याख्यान
भारत की सुरक्षा के बड़े खतरे जनसंख्या विस्फोट और भ्रष्टाचार
कानून बदलने और न्याय व्यवस्था में सुधार और समान शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता
चित्तौड़गढ़ में बोले राष्ट्रवादी चिंतक, पी एल आई मेन ऑफ इंडिया सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय
चित्तौड़गढ़। भारत की सुरक्षा में सिर्फ आतंकवादी या अलगाववाद ही नहीं आंतरिक और बाहरी और भी कई खतरे हैं, और विभिन्न खतरों व समस्याओं के मूल कारण है भ्रष्टाचार और जनसंख्या विस्फोट। जब तक हमारे देश की सुरक्षा में सबसे बड़े बाधक खतरों के खिलाफ सख्त कानून व्यवस्था नहीं बनाई जाती तब तक सुरक्षित भारत की कल्पना करना निरर्थक है। देश की लचर कानून व्यवस्था को बदलने और त्वरित न्याय व्यवस्था लागू करने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जाने से देश की आधी से अधिक समस्याएं खत्म हो जाएगी। उक्त विचार शनिवार को जन चेतना मंच राजस्थान की चित्तौड़गढ़ शाखा द्वारा गणगौर गार्डन में आयोजित "सुरक्षित भारत" विषय पर जन चेतना व्याख्यान के मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रवादी चिंतक, पी एल आई मेन ऑफ इंडिया सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने व्यक्त किए। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जहां आतंकवाद से देश में प्रतिवर्ष 2000 लोगों की जान जाती है, लेकिन नशे की वजह से हर साल 2 लाख से भी ज्यादा लोगों की मौत होती है। डेढ़ सौ करोड़ की आबादी में 10 करोड लोग नशे की गिरफ्त में हैं । इसी तरह प्रतिवर्ष एक करोड़ लोगों में से 25 लाख लोग अकाल मृत्यु के शिकार होते है। जो प्रदूषण,भुखमरी, विभिन्न बीमारियों और सड़क व अन्य हादसों के शिकार हो जाते हैं। उपाध्याय ने कहा कि इनका विश्लेषण किया जाए तो मुख्य रूप से दो प्रमुख कारण सामने आते हैं भ्रष्टाचार और जनसंख्या विस्फोट। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान बनने समय 10 देश के संविधान पढ़कर उनकी अच्छी बाते इसमें शामिल की गई। भारत के संविधान में साफ अंकित है जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाओ, मगर आजादी के 75 वर्ष बाद भी इस मुद्दे पर संसद या विधानसभा में चर्चा नहीं हुई। जनसंख्या बढ़ने के साथ ही गरीबों का रेशों भी बढ़ रहा है, राजनीतिक दल इन पर कभी चर्चा नहीं करते। देश के 40 जिलों में भूजल स्तर शून्य है, कई जिलों में अपराध, नशाखोरी, मिलावट खोरी निरंतर बढ़ रहे हैं , नदियां छोटी होती जा रही है, जंगल साफ हो रहे हैं, और आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही है। यदि यही हाल रहे तो आगामी 25 वर्षों के बाद भारत में रहने के लिए जगह नहीं बचेगी। जनसंख्या विस्फोट रोकने के लिए एक देश एक विधान, जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग जागरूक जनता को ही उठानी पड़ेगी। जनता अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से जब तक देश के सर्वोच्च सदनों में अपनी आवाज को मुखर नहीं करेगी स्थिति और भयावह होती जाएगी। उन्होंने कहा जिस देश में राम, कृष्ण, तीर्थंकर, गुरुओं और महापुरुषों का जन्म हुआ, कई मठ मंदिर है,और विद्वान इस धरा पर अवतरित हुए इसके बावजूद कहा जाता है कि कलयुग चल रहा है जबकि जिन देशों में महापुरुषों का जन्म नहीं हुआ ऐसे कई देशों में सतयुग है, कितनी विचारणीय बात है। जहां राम मंदिर तो है पर राम की नीति लागू नहीं, जहां कृष्ण मंदिर है लेकिन कृष्ण की नीति लागू नहीं। उन्होंने पूर्वजों और विद्वानों के विचारों व 'भय बिन होय न प्रीत' उक्ति की प्रासंगिकता बताते हुए कहा कि 1984 के सिख नरसंहार या 1990 के कश्मीर नरसंहार अथवा हत्या जैसे गंभीर सार्वजनिक अपराधों पर भी त्वरित न्याय नहीं होने और अपराधियों को फांसी जैसी कड़ी सजा नहीं होने से असुरक्षा का वातावरण बनता है। आधी समस्याओं का मूल कारण लचर और पुरानी न्याय व्यवस्था को बताते हुए उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि जिस देश में कोई भी राजनीतिक दल और सरकारें इस पर चर्चा नहीं करती उस देश की शिक्षित और जागरूक जनता क्यों चुप है? अश्वनी उपाध्याय ने आव्हान किया कि जस्टिस विदइन ईयर के लिए जागरूकता पूर्वक अपने जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सरकार को कानून बनाने की मांग मुखर करना चाहिए जिसमें एक इंडियन पेनल कोड बनाने की मांग हो। देश की असुरक्षा और दूसरी प्रमुख समस्या भ्रष्टाचार के बारे में विस्तार पूर्वक उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा की घूसखोरी, मिलावट खोरी, तस्करी , आतंकवाद अलगाववाद के लिए फंडिंग सहित अन्य अन्य कारणों से हो रहा भ्रष्टाचार भी कड़े कानून लागू करने से ही रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि आंकड़ों के अनुसार भारत में 88 फ़ीसदी लोग प्रतिदिन ₹100 से भी कम खर्च करने की श्रेणी में आते हैं और ज्यादातर लेनदेन ऑनलाइन माध्यम से होता है तो फिर बड़े नोटों की उपयोगिता ही क्या?
उपाध्याय ने भ्रष्टाचार रोकने के लिए भी सिर्फ लोकपाल और लोकायुक्त बैठने से नहीं बल्कि कानून बदलने और न्याय व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। प्रख्यात चिंतक अश्वनी उपाध्याय ने देश की शिक्षा पद्धति में भी बदलाव लाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि वन नेशन वन सिलेबस, यूनिफॉर्म एजुकेशन सिस्टम को लागू किया जाना भारतवर्ष में महती आवश्यकता है। शिक्षा में गुरुकुल पद्धति के अनुसार आत्मनिर्भरता, संस्कार, नैतिक और मूल्य के साथ ही व्यवहारिक शिक्षा का समावेश होना चाहिए। उन्होंने कहा भारत वर्ष की भारद्वाज संहिता में सब कुछ अंकित है, जिस ज्ञान को विभिन्न देशों ने अपनाया लेकिन भारत में उसे कभी बताया नहीं गया। भारत में फिर से गुरुकुल, वैदिक व्यवस्था को लागू किए जाने और वन नेशन वन सिलेबस, एक एजुकेशन बोर्ड से पूरे देश में जोनल बोर्ड बनाकर शिक्षा व्यवस्था को लागू किया जाना चाहिए, समान शिक्षा से सामाजिक समरसता भी बढ़ेगी। उपाध्याय ने सुरक्षित भारत और भारत में सतयुग की स्थापना के लिए आमजन से आव्हान किया कि राजनीतिक दलों के बहकावे में नहीं आकर उन्हें जनता के हितों और देश हित में नीति बनाने के लिए दिशा दिखाएं। कार्यक्रम में प्रमुख उद्यमी राधाकिशन फुलवानी व नरेंद्र चोर्डिया, बैंक ऑफ बड़ौदा के पूर्व महाप्रबंधक प्रकाश जैन,मंच प्रांतीय अध्यक्ष हेमंत शर्मा,प्रांतीय महामंत्री श्रीकांत शर्मा ,संरक्षक डा आई एम सेठिया मंचासीन थे।मंच के संस्थापक डॉ. आई एम सेठिया ने कार्यक्रम की प्रस्तावना और मेरी आवाज मेरा समाधान विषय पर हो रहे व्याख्यान की भूमिका राखी।प्रांतीय अध्यक्ष हेमंत शर्मा के स्वागत उद्बोधन दिया।विशिष्ठ अतिथि राधाकिशन फुलवानी ने भी विचार व्यक्त किए। अतिथियों द्वारा भारतमाता के चित्र पर दीप प्रज्वल्लन के बाद नगर अध्यक्ष राधेश्याम लड्ढा,सदस्य नंदकिशोर पारीक,राजेश शर्मा व भवानी शंकर जीनगर कपासन ने अतिथियों का शाल उपरना से स्वागत अभिनंदन किया।समारोह का संचालन मंच के तहसील अध्यक्ष सत्यनारायण सिकलीगर, व सदस्य वंदना वजीरानी ने किया। प्रांतीय महामंत्री श्रीकांत शर्मा ने आभार व्यक्त किया।