चित्तौड़गढ़ जिला जेल में अवैध सामान सप्लाई का खुलासा
चित्तौड़गढ़ जिला जेल में बंदियों को लंबे समय से निषिद्ध सामग्री उपलब्ध कराए जाने का गंभीर मामला सामने आया है।
चित्तौड़गढ़। चित्तौड़गढ़ जिला जेल में बंदियों को लंबे समय से निषिद्ध सामग्री उपलब्ध कराए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। विभागीय जांच में खुलासा हुआ है कि जेल स्टाफ की मिलीभगत से बंदियों तक प्रतिबंधित सामान पहुंचाया जा रहा था, जिसके बदले बंदियों के परिजनों से बैंक खातों और यूपीआई के माध्यम से मोटी रकम वसूली गई।
जेल प्रशासन द्वारा कराई गई जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद अधीक्षक महानिदेशालय कारागार जयपुर दिनेश कुमार मीणा के निर्देश पर चित्तौड़गढ़ कोतवाली थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।
जनवरी 2022 से जनवरी 2023 तक चला अवैध लेन-देन
विभागीय जांच में सामने आया कि जनवरी 2022 से जनवरी 2023 के बीच यह पूरा नेटवर्क सक्रिय रहा। इस दौरान निषिद्ध सामग्री जेल के भीतर पहुंचाई जाती रही और इसके बदले अवैध रूप से पैसों का लेन-देन हुआ। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि लेन-देन सीधे बंदियों और जेल कर्मचारियों के बीच न होकर, बंदियों के परिजनों के बैंक खातों व यूपीआई आईडी के माध्यम से किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए महानिदेशालय कारागार जयपुर ने चित्तौड़गढ़ जिला पुलिस अधीक्षक को शिकायत भेजी, जिसके आधार पर कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज की गई।
विभागीय जांच में चौंकाने वाले खुलासे
शिकायत के आधार पर कराई गई विभागीय जांच की जिम्मेदारी अधीक्षक केंद्रीय कारागृह उदयपुर को सौंपी गई थी। जांच रिपोर्ट में तत्कालीन डिप्टी जेलर अशोक पारीक सहित कुछ जेल कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कुछ बंदी जेल की चारदीवारी के ऊपर से बाहर से फेंकी गई निषिद्ध सामग्री को अंदर मंगवाते थे और चोरी-छिपे अन्य बंदियों को उसका उपयोग करवाते थे।
तीन बंदियों के खिलाफ दर्ज हुआ मामला
जांच रिपोर्ट के आधार पर कोतवाली थाने में चित्तौड़गढ़ जिला जेल में बंद रहे तीन बंदियों—मोहनलाल मीणा, मोहनलाल जाट और लालूराम मीणा—के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। कोतवाली थाने के एएसआई अर्जुन गुर्जर ने बताया कि महानिदेशालय कारागार जयपुर की शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। पुलिस ने संबंधित सभी दस्तावेज मंगवाकर गहन जांच शुरू कर दी है।
जेल स्टाफ की भूमिका भी जांच के दायरे में
इस मामले में तत्कालीन जेल अधीक्षक योगेश तेजी, डिप्टी जेलर अशोक पारीक सहित अन्य जेल स्टाफ के बयान भी दर्ज किए गए हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कुल कितनी राशि का लेन-देन हुआ और इसमें किन-किन लोगों की संलिप्तता रही। पुलिस का कहना है कि केस फाइल के अध्ययन के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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