भारत विकसित राष्ट्र ना बन सके इसके लिए विपक्ष फैला रहा है भ्रम, राम का नाम सुनते शुरू कर देते हैं विरोध - सीपी जोशी
सांसद सीपी जोशी ने वीबी-जी राम जी योजना को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम पर किया प्रहार वीबी-जी राम जी’’ योजना नए युग की शुरूआत, ग्रामीण विकास में साबित होगा मील का पत्थर - सीपी जोशी
सांसद सीपी जोशी ने वीबी-जी राम जी योजना को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम पर किया प्रहार
वीबी-जी राम जी’’ योजना नए युग की शुरूआत, ग्रामीण विकास में साबित होगा मील का पत्थर - सीपी जोशी
चित्तौड़गढ़ । चित्तौड़गढ़ सांसद एवं पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने आज चित्तौड़गढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में “विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी)” को लेकर कांग्रेस एवं विपक्षी दलों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल देश में जानबूझकर भ्रांतियां फैला रहे हैं, ताकि भारत विकसित राष्ट्र न बन सके, राम के नाम और विकसित भारत के संकल्प को लेकर जनता के मन में भ्रम पैदा हो तथा देश को पुनः पिछड़ेपन और पर-निर्भरता की ओर धकेला जा सके। सांसद सीपी जोशी ने कहा कि जिन लोगों ने दशकों तक प्रभु श्रीराम के मंदिर निर्माण में बाधाएं डालीं, रामसेतु के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगाए और न्यायालयों में हलफनामे देकर राम के ऐतिहासिक महत्व को नकारने का प्रयास किया, वही आज “राम” और “विकसित भारत” के नाम पर आपत्ति जता रहे हैं। उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लिए गए 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प से भी पीड़ा है। सांसद सीपी जोशी ने कहा कि लोकसभा में केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रस्तुत “वीबी-जी राम जी” विधेयक देश के गरीब, किसान, मजदूर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। योजना के नाम को लेकर कांग्रेस द्वारा की जा रही आपत्तियों पर कहा कि जिनका गांधी जी के सिद्धांतों से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं, वे ही आज गांधी के नाम की दुहाई दे रहे हैं, जबकि बापू के सपनों को साकार करने का कार्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कर रहे हैं। चाहे वह स्वच्छता अभियान हो, रामराज्य की परिकल्पना हो या अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का सशक्तिकरण हो। सांसद सीपी जोशी ने कहा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में योजनाओं के नाम बार-बार बदले। राष्ट्रीय रोजगार कार्यक्रम, जवाहर रोजगार योजना, नरेगा और फिर 2009 के लोकसभा चुनाव से पहले मनरेगा। इसी प्रकार इंदिरा आवास योजना सहित सैकड़ों योजनाएं नेहरू-गांधी परिवार के नाम पर रखी गईं, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने 12 वर्षों में एक भी योजना अपने नाम पर नहीं की। सांसद सीपी जोशी ने कहा कि उन्होंने सिर्फ ढोल पीटा लेकिन योजना का लाभ उस गरीब तक नहीं पहुंचा। उन्होंने आंकड़ों के माध्यम से बताया कि यूपीए शासनकाल में मनरेगा के तहत लगभग 153 लाख कार्य पूरे हुए, जबकि मोदी सरकार में यह संख्या 862 लाख से अधिक रही। यूपीए के 10 वर्षों में 1608 श्रम दिवस सृजित हुए, वहीं मोदी सरकार के कालखंड में 3210 श्रम दिवस सृजित हुए। मनरेगा में अब तक 11.74 लाख खर्च किए गए जिसमें मोदी सरकार ने 8.53 लाख करोड़ रूपये खर्च किए। पहले 100 दिन की रोजगार गारंटी थी, जिसे बढ़ाकर 125 दिन किया गया है तथा जनजातीय क्षेत्रों में 25 अतिरिक्त दिन का प्रावधान किया गया है। महिलाओं की भागीदारी यूपीए काल में लगभग 45 प्रतिशत थी, जो मोदी सरकार में बढ़कर साढ़े 56 प्रतिशत से अधिक हो गई है। सांसद सीपी जोशी ने कहा कि इंटरनेशनल मॉनिटरिंग फंड जो एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है के अनुसार पिछले 10 वर्षों में लगभग 25 करोड़ भारतीय गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। यह संभव हुआ क्योंकि गरीबों को पक्का आवास, शौचालय, उज्ज्वला गैस कनेक्शन, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य कार्ड, बिजली कनेक्शन, मुफ्त राशन और रोजगार की गारंटी जैसी सुविधाएं मिलीं। सांसद सीपी जोशी ने कहा कि ’’वीबी-जी राम जी योजना” प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध बनाने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी। हर गरीब को रोजगार मिले उसकी गरिमा को सम्मान मिले इसलिए योजना में कुछ आमूलचूल परिवर्तन किए गए है। नए मिशन के अंतर्गत अब ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण होगा, सभी कार्यों की जियो-टैगिंग, पारदर्शी मॉनिटरिंग और पंचायत से लेकर केंद्र तक सुदृढ़ अनुमोदन प्रणाली लागू होगी। इससे जल संरक्षण, तालाब, भंडारे, गोदाम, सड़कें, पुस्तकालय भवन, सोलर लाइट, सामुदायिक संरचनाएं और अन्य विकास परियोजनाएं साकार होंगी, जिससे “विकसित पंचायत” और “विकसित गांव” की संकल्पना को मजबूती मिलेगी।
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