भद्राकाल एवं चन्द्र ग्रहण के पश्चात किया जा सकेगा होलिका दहन*

इस वर्ष बन रहे चन्द्र ग्रहण एवं भद्रा दोष के कारण होलिका दहन को लेकर अलग- अलग मत देखने को मिल रहे है । वैदिक पंचाग के आधार पर ज्योतिषाचार्य डॉ. संजय गील ने बताया की फाल्गुन पूर्णिमा तिथि सोमवार 2 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 55 मिनट से प्रारंभ होकर मंगलवार 3 मार्च को शाम 5 बजकर 8 मिनट पर समाप्त होगी

Mar 2, 2026 - 09:00
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भद्राकाल एवं चन्द्र ग्रहण के पश्चात किया जा सकेगा होलिका दहन*

भद्राकाल एवं चन्द्र ग्रहण के पश्चात किया जा सकेगा होलिका दहन

सनातन धर्म में दो दिवसीय होलिका पर्व रंगों, उमंग और नई ऊर्जा का पर्व होने के साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है । साथ ही होलिका दहन की अग्नि से आसपास और हमारे जीवन की समस्त नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है । इस वर्ष बन रहे चन्द्र ग्रहण एवं भद्रा दोष के कारण होलिका दहन को लेकर अलग- अलग मत देखने को मिल रहे है । वैदिक पंचाग के आधार पर ज्योतिषाचार्य डॉ. संजय गील ने बताया की फाल्गुन पूर्णिमा तिथि सोमवार 2 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 55 मिनट से प्रारंभ होकर मंगलवार 3 मार्च को शाम 5 बजकर 8 मिनट पर समाप्त होगी ।ज्योतिषीय आधार पर इसी मध्य सोमवार 2 मार्च शाम 5:55 बजे से मंगलवार 3 मार्च प्रातः 5:32 बजे तक भद्रा काल एवं 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:46 बजे तक खग्रास चंद्र ग्रहण का प्रभाव भारत वर्ष में देखने को मिलेगा, जबकि सुतक काल इसी दिन प्रातः 09:30 से प्रारंभ हो जाएगा । इस प्रकार सोमवार 02 मार्च को भद्रा के पूंछ काल में एवं मंगलवार 03 मार्च को चन्द्र ग्रहण के पश्चात शुभ मुहूर्त में होलिका दहन एवं 04 मार्च को धुलंडी पर्व मनाया जा सकेगा । इस बार होली पर मालव्य राजयोग, बुधादित्य राजयोग, शुक्रादित्य राजयोग, लक्ष्मी नारायण योग और धनशक्ति योग जैसे प्रभावशाली शुभ संयोग बनने जा रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब शुक्र, बुध और सूर्य जैसे प्रमुख ग्रह शुभ स्थिति में आकर केंद्र या त्रिकोण भाव को प्रभावित करते हैं, तो व्यक्ति के जीवन में धन, पद, प्रतिष्ठा और अवसरों की वृद्धि होती है । 

*होलिका दहन शुभ मुहूर्त*

निर्णय धर्म सिंधु एवं वैदिक पंचाग के आधार पर ज्योतिषाचार्य डॉ. संजय गील ने बताया की होलिका दहन के लिए भद्रा रहित प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि को उत्तम माना गया है । स्थान एवं मतान्तर के आधार पर होलिका दहन 02 एवं 03 मार्च दोनों ही दिवसों में एक समय विशेष में किया जा सकेगा । शास्त्रों में कहा गया है कि भद्रा के समय होलिका दहन नहीं किया जाता, लेकिन अगर पूरी रात भद्रा हो तो भद्रा के पुच्छ भाग में दहन करना शुभ माना जाता है। इस प्रकार सोमवार 2 मार्च को रात्रि 12:50 से 2:02 एवं सूर्योदय से पहले सुबह 5 बजकर 19 मिनट से 6 बजकर 55 मिनट तक होलिका दहन किया जा सकेगा ।इसी प्रकार गणना के आधार पर 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण और सूतक काल शाम 06:46 तक ही रहेगा एवं पूर्णिमा तिथि 05 बजकर 07 मिनट पर समाप्त हो जाएगी लेकिन तब भी प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि रहेगी। इस प्रकार 3 मार्च को भी को सूतक काल के बाद शाम 6 बजकर 50 मिनट से रात 8 बजकर 50 मिनट तक विधि-विधान से पूजा और होलिका दहन करना शुभ है , जबकि रंगों का पर्व धुलंडी 04 मार्च को ही मनाया जाना शास्त्र सम्मत है ।

*ये करे विशेष उपाय :-*

• अगर आप लंबे समय से आर्थिक तंगी से परेशान हैं तो होली के दिन माता तुलसी की पूजा आराधना करे । लाल कपड़े में तुलसी की मंजरी को बांधकर तिजोरी अथवा पर्स में रखे मान्यता के अनुसार इससे आर्थिक तंगी से भी मुक्ति मिलती है ।

• वास्तु दोष से मुक्ति पाने के लिए होली के दिन तुलसी पर गुलाल अर्पित करे ।

• लड्डू गोपाल का विधि विधान पूर्वक अभिषेक करें ।

• होलिका दहन के समय 11 बार “ॐ लक्ष्मी नारायणाय नमः” मंत्र का जाप करें ।

• जलती हुई होलिका में सात गोमती चक्र अर्पित करें, यह धन संबंधी बाधाओं को दूर करेगा ।

• नौकरी में अगर बाधा आ रही है या रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे हैं, तो होलिका की अग्नि में जौ अर्पित करें और भगवान नारायण का स्मरण करें ।

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Avinash chaturvedi

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