पंडित मूलचंद शर्मा के भजनों की बही सरिता
pandit moolachand sharma ke bhajanon kee bahee sarita
गंगरार ,हरि के भजन बिना, बीती जिंदगानी रे, "लाख बार कहीं मनवा, एक हूं न मानी रे" साथ ही भजन "मन थू मद छकियों रे ऊंट, फिर तूं डोले चारों खूंट" उक्त दोनों भजन मेवाड़ी कवि, भजनोपदेशक तथा कथा वाचक स्वर्गीय पंडित मूलचंद शर्मा द्वारा रचित मूल भजन माला का उपरोक्त भजन की पंक्तियां बुधवार रात्रि मकर संक्रांति पर्व पर राम गली स्टेशन गंगरार में उनके पुत्र मधुसूदन शर्मा पंचारिया के नचिकेता निकेतन पर स्वर्गीय शर्मा की 51वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह, एवं भजन जागरण मे राष्ट्रकवि,शिक्षाविद , गीतकार व भजन गायक सोहनलाल चौधरी ने बतोर मुख्य अतिथि भजन गाते हुए स्वर्गीय पंडित शर्मा की रचनाओ की मिमांशा करते हुए कहा कि उनकी रचनाएं विशुद्ध साहित्य व राजस्थानी भाषा में मूल आत्मानुभव के दोहे, संगीत व भजन विविध राग रागनियो में रचित धार्मिक ,आध्यात्मिक व ईश्वर भक्ति के सरल मार्ग का निरूपण कर सामाजिक जीवन में उपयोगी व प्रेरणादाई बताया । उन्होंने कहा कि जनमानस में आज भी उनके अनुयाई श्रद्धा के साथ इन रचनाओं को गा व श्रवण कर आनन्द की अनुभूति करते हैं। भजन जागरण में व्यास पीठ से पंडित जगदीश प्रसाद शर्मा ने गणपति वन्दना कर "सागरिया रा नीर गागर माही भरिया रे, व" दुनिया के दीवाने नर क्यूं नारायण बिसराय दिया तथा जगदीश भजन गंगा में स्वरचित भजनों की प्रस्तुतियां दे " पिताश्री स्वर्गीय पंडित शर्मा द्वारा रचित भजनों की आध्यात्मिक प्रकाश डालते हुए उनकी जीवनी, शिक्षा , मौलिक रचनाओं तथा पुण्य तिथि पर आयोजित परम्परागत कार्य क्रम का महत्व बताते हुए कहा कि उनकी रचनाएं अद्भुत, करुण रस प्रधान व कालजयी होकर आत्मसात करने योग्य है। समारोह व भजन जागरण आयोजक महासभा के पूर्व उप प्रधानमंत्री मधुसूदन शर्मा पंचारिया ने श्रद्धांजलि सभा का संचालन करते हुए मकर संक्रांति पर्व व आयोजन की परम्परा का महत्व बता आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता करते हुए अखिल भारतवर्षीय श्रीगुर्जर गौड ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष सतीश चंद्र पंचारिया, दादू सेवक समिति के अध्यक्ष बालकृष्ण शर्मा, पेंशन समाज अध्यक्ष रमेश चंद्र काखानी, सेवाभारती के जिला अध्यक्ष भूरालाल शर्मा, जैन समाज मंत्री व महावीर इंटरनेशनल के कोषाध्यक्ष सागर मल सुराणा , पवनसुत गोपाल गौशाला के मंत्री अशोक कुमार कोंचिटा, डॉ भीमराव अंबेडकर संस्थान के जिला अध्यक्ष मांगीलाल रेगर, सीकेएसबी बैंक के पूर्व अध्यक्ष देवी सिंह राठौड़ देवाजी जाट बावड़ीखेड़ा, खेम राज सनाढ्य, मधुकर आचार्य, नारायण सुथार , विनोद शर्मा भीलवाड़ा, देवकरण गुजराती व पूर्ण मल रेगर ने बतोर विशिष्ट अतिथि साथ ही गणमान्य व समाजजनों ने श्रद्धांजलि सभा को सम्बोधित कर स्वर्गीय पंडित शर्मा को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। रात्रि के चौथे पहर तक चले भजन जागरण में भजन गायक तुलसीराम बरिया "तेरी कंचन जैसी काया फिर क्यों माया में भरमाया", हस्तीमल सुराणा ने कंचन वाली काया रे, सैलानी में तो पावना, , इन्द्रमल नोग्या ने "गुरु बनाबो सहज जगत में, नेम निभाणो सहज नहीं," प्रहलाद बरिया ने "राणाजी थारो देशडलो रंग रूठो", भजन गायक राम लाल नोग्या ने " रे नर कर उस दिन को याद, एक दिन चल चल होगी" हरीश चंद्र जाट ने "श्रीराम चले वनवास, लगाकर आस हो रघुवर प्यारा" मदन लाल टेलर ने "अवसर आया तेरा नर,पीले पियाला हरि रस भर" साथ ही ओडून्द के भजन गायक पृथ्वी राज गंधर्व ने "भजन मन राम चरण सुखदाई"भजनों की प्रस्तुतियां दी। इस अवसर पर भजन गायक रतन लाल टेलर, जीतमल सरेकु, मनोज शर्मा, धर्मेंद्र शर्मा, परमेश्वर नोग्या, किशन लाल लुहार, मनोहर सिंह राव, आदि क ई भजन गायकों ने भजनों की प्रस्तुतियां दी। अतिथियों का स्वागत शर्मा पंचारिया परिवार के पंडित जगदीश प्रसाद शर्मा, मधुसूदन शर्मा, एडवोकेट कमलेश शर्मा, चंद्रशेखर शर्मा, गिरीराज शर्मा, अखिलेश शर्मा व प्रिन्स शर्मा ने ऊपरना पहना स्वागत अभिनंदन किया। ढोलक पर संगत बालूराम, नारायण लाल एवं पृथ्वीराज गंधर्व ने की।
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