शोभागपुरा के शुभ केशर गार्डन में श्रीमद् भागवत ज्ञान कथा यज्ञानुष्ठान 22 से
पर्यटन की दृष्टि से विश्व प्रसिद्ध झीलों की नगरी में एक बार फिर भक्ति, धर्म और ज्ञान की धारा प्रवाहित होगी।
उदयपुर। पर्यटन की दृष्टि से विश्व प्रसिद्ध झीलों की नगरी में एक बार फिर भक्ति, धर्म और ज्ञान की धारा प्रवाहित होगी। अवसर होगा शोभागपुरा में सौ फीट रोड पर शुभ केशर गार्डन में सोमवार से आयोजित होने वाला सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञानुष्ठान।
आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. मृदुल कोठारी और सीए आशीष कोठारी ने बताया कि सावा वाले श्रीमती गुलाब कोठारी, डॉ. नाहरसिंह कोठारी एवं परिवार की ओर से पुरखों की पुण्य स्मृति में आयोजित इस अनुष्ठान में दिव्य आनंदधाम, श्रीरामद्वारा बड़ीसादड़ी के महाराज स्वामी श्री अनंतरामजी शास्त्री अपनी ओजपूर्ण मधुर वाणी में धर्म और सत्य की स्थापना के लिए विष्णु अवतार सच्चिदानंदघन परमात्मा भगवान श्रीकृष्ण की विविध लीलाओं और प्रसंगों पर गहन व्याख्यान देंगे।
संयोजक हेमंत लड्ढा ने बताया कि 22 से 28 दिसंबर तक चलने वाले इस अनुष्ठान में प्रथम और अंतिम दिन को छोड़कर प्रतिदिन दोपहर 2 से 5 बजे तक कथा प्रवचन होगा भक्ति की सरिता बहेगी। इसमें बड़ी संख्या में कृष्णभक्त हर्ष, उत्साह, उमंग से हिस्सा लेंगे और लाभान्वित होंगे। पहले दिन सोमवार को सुबह 10 बजे से जलकलश एवं पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भागवत महापुराण पोथी की शोभायात्रा का आयोजन भी होगा। शोभायात्रा सत्यनारायण मंदिर से शुरू होकर अशोक नगर रोड नंबर 5, न्यू भूपालपुरा और राणाजी मंदिर होते हुए शुभ केशर गार्डन पहुंचेगी। इस भव्य शोभायात्रा में बड़ी संख्या में धर्मावलंबी भक्त पुरुष और महिलाएं हिस्सा लेंगे। मातृशक्ति सुंदर वस्त्राभूषण से सज-धज कर सिर पर कलश धारण कर शिरकत करेंगी। भजनों की भक्तिरसधार के साथ निकलने वाली इस शोभायात्रा में कथा प्रवचनकार महाराज स्वामी श्री अनंतरामजी शास्त्री रथ में विराजमान होंगे। भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों और मंगल ध्वनि के साथ यह शोभायात्रा धार्मिक माहौल सृजित करते हुए कथास्थल पहुंचेगी। इसके उपरांत 11 बजे से 2 बजे तक स्वामी अनंतरामजी शास्त्री के मुखारविंद से महापुराण माहात्म्य पर प्रवचन होगा। आयोजक डॉ. एन. एस. कोठारी एवं श्रीमती गुलाब कोठारी ने बताया कि श्रीमद्भागवत महापुराण भारतीय पुराण वांग्मय में विशिष्ट, अनूठा और महत्वपूर्ण ग्रन्थ है, जिसमें बारह स्कंध, 335 अध्याय और 18 हजार श्लोक हैं, जो मानव को इस सृष्टि के सार से रूबरू करवाते हैं और सत्य, स्नेह, प्रेम, सद्भाव, सौहार्द्र, समरसता, सहयोग, साहचर्य, सहिष्णुता, औदार्य, वैराग्य, धर्माचरण के साथ सकारात्मक मार्ग अपनाने और इसी के अनुरूप चलने की प्रेरणा देते हैं। दक्षिणी राजस्थान प्रादेशिक माहेश्वरी युवा संगठन के सह सचिव सौरभ लड्ढा ने श्रद्धालुओं से इस महायज्ञ में आहुति स्वरूप बड़ी संख्या में शिरकत करने का आग्रह किया है। उन्होंने बताया किआयोजन की तैयारियां लगभग पूर्ण हो चुकी हैं। पंडाल सज चुका है। मातृशक्ति और पुरुषों के बैठने की अलग अलग व्यवस्था की गई है।
What's Your Reaction?