हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा गणगौर पर्व, महिलाओं में उत्साह चरम पर
Gangaur festival will be celebrated with great enthusiasm, enthusiasm among women is at its peak.
चित्तौड़गढ़ में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा गणगौर पर्व, महिलाओं में उत्साह चरम पर
चित्तौड़गढ़। चैत्र शुक्ल तृतीया, दिनांक 21 मार्च 2026 को मनाया जाने वाला गणगौर पर्व इस वर्ष पूरे उत्साह, श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाएगा। भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
गणगौर के अवसर पर विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना के साथ व्रत एवं पूजन करती हैं, वहीं कुंवारी कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति हेतु गौरी माता की आराधना करती हैं। यह पर्व देवी पार्वती के मायके आगमन और पुनः भगवान शिव के साथ उनके विदा होने की पौराणिक परंपरा का प्रतीक है।
इसी दिन भगवान विष्णु के प्रथम अवतार मत्स्य अवतार की जयंती भी श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार मत्स्य अवतार ने प्रलय से वेदों और सृष्टि की रक्षा की थी, इसलिए इस दिन विशेष पूजन और दान का महत्व बताया गया है।
इसी संदर्भ में ॐ तत्सत् पारमार्थिक संस्था, चित्तौड़गढ़ के ज्योतिषाचार्य पं. विकास उपाध्याय ने बताया कि गणगौर पर्व की तैयारियां होलिका दहन के अगले दिन से ही प्रारंभ हो जाती हैं और श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से पूजन करते हैं।
पूजन विधि और परंपराएं
महिलाएं मिट्टी या काष्ठ से ईसर-गौर की प्रतिमाएं बनाकर उन्हें चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर स्थापित करती हैं। इसके पश्चात् गौरी माता का श्रृंगार मेहंदी, सिंदूर, चूड़ियां और अन्य सुहाग सामग्री से किया जाता है।
पूजन में रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, दूर्वा, चंदन तथा विशेष रूप से ‘गुने’ (मिठाई) का भोग अर्पित किया जाता है। महिलाएं शुद्ध जल, दूध, दही, हल्दी और कुमकुम से ‘सुहाग जल’ तैयार कर दूब के माध्यम से गणगौर पर तथा स्वयं पर छिड़कती हैं। इस दौरान गणगौर की कथा श्रवण एवं पारंपरिक लोकगीतों का गायन वातावरण को भक्तिमय बना देता है।
विसर्जन का विशेष महत्व
पर्व के अंतिम दिन शुभ मुहूर्त में गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा निकालकर किसी पवित्र सरोवर या नदी में ईसर-गौर की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। यह परंपरा वैवाहिक निष्ठा, वसंत ऋतु और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।
शुभ मुहूर्त (21 मार्च 2026)
• प्रातः: 08:09 बजे से 09:39 बजे तक
• दोपहर: 12:15 बजे से 01:03 बजे तक
• दोपहर 12:39 बजे से सांय 05:09 बजे तक
गणगौर के साथ मत्स्य अवतार जयंती का यह पावन संयोग श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है, जो धर्म, आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है
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