भाजपा का स्वदेशी मेला महज एक प्रोपोगेंडा: जाड़ावत
राजस्थान सरकार के पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्रसिंह जाड़ावत ने भाजपा सरकार द्वारा आयोजित किए जा रहे तथाकथित स्वदेशी मेले को महज एक प्रोपोगेंडा करार दिया है।
उन्होंने कहा कि भारत में मेले लगाने की परंपरा सदियों पुरानी है और आज़ादी के बाद कांग्रेस सरकारों ने भी स्थानीय उत्पादों, कारीगरों और स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर मेले आयोजित किए हैं।
जाड़ावत ने कहा कि भाजपा के शीर्ष नेता और स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उपयोग में आने वाले कपड़े, चश्मे, पेन और वाहन तक विदेशी बताए जाते हैं, ऐसे में आम जनता को स्वदेशी के नाम पर भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने जीवन भर हाथ कती खादी पहनकर उदाहरण प्रस्तुत किया। नमक कर के विरोध में उन्होंने साबरमती आश्रम से समुद्र तट तक 390 किलोमीटर की ऐतिहासिक यात्रा कर स्वदेशी नमक के उपयोग का संदेश दिया और देशवासियों से विदेशी सामान, विदेशी शिक्षा और विदेशी नौकरी के बहिष्कार का आह्वान किया। गांधीजी के आह्वान पर देशभर में विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार हुआ और स्वदेशी आंदोलन स्वतंत्रता संग्राम का अभिन्न हिस्सा बना।
उन्होंने कहा कि भाजपा के स्थानीय जनप्रतिनिधि भी स्वदेशी के नाम पर केवल दिखावे की राजनीति कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने खादी को बढ़ावा देने के लिए 50 प्रतिशत की छूट दी, लेकिन भाजपा सरकार इस पर प्रभावी ढंग से आगे नहीं बढ़ सकी। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने आज़ादी से पहले ही सौ वर्षों से खादी अपनाकर स्वदेशी की परंपरा को मजबूत किया।
जाड़ावत ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी स्वदेशी को अपने जीवन और नीतियों में अपनाया। बचपन से ही स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया और 1921 में विदेशी गुड़िया जलाकर आंदोलन में भाग लिया। प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने आत्मनिर्भरता की नीति को आगे बढ़ाया, जिसमें आयात-प्रतिस्थापन और सार्वजनिक क्षेत्र के विस्तार पर जोर दिया गया, जिससे देश की आर्थिक संप्रभुता सुदृढ़ हुई। उन्होंने 17 वर्षों तक एम्बेसडर कार का उपयोग कर सादगी और स्वदेशी का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। स्वदेशी का वास्तविक अर्थ केवल आयोजन नहीं, बल्कि व्यवहार और नीतियों में उसका ईमानदार पालन है।
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