नैनो, बायोटेक्नोलॉजी व ग्रीन केमिस्ट्री में नवाचार और सतत विकास पर हुआ विचार विमर्श
मेवाड़ विश्वविद्यालय के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस “रिसेंट ट्रेंड्स इन नैनो/बायोटेक्नोलॉजी एंड ग्रीन केमिस्ट्री फॉर एनवायरनमेंटल, फार्मास्यूटिकल एंड हेल्थकेयर एप्लीकेशंस का शनिवार को समापन हुआ।
मेवाड़ विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का सफल समापन
नैनो, बायोटेक्नोलॉजी व ग्रीन केमिस्ट्री में नवाचार और सतत विकास पर हुआ विचार विमर्श
गंगरार। मेवाड़ विश्वविद्यालय के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस “रिसेंट ट्रेंड्स इन नैनो/बायोटेक्नोलॉजी एंड ग्रीन केमिस्ट्री फॉर एनवायरनमेंटल, फार्मास्यूटिकल एंड हेल्थकेयर एप्लीकेशंस का शनिवार को समापन हुआ। कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य नैनो टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी एवं ग्रीन केमिस्ट्री के क्षेत्र में हो रहे नवीन अनुसंधानों, नवाचारों एवं उनके सतत विकास में योगदान पर विचार-विमर्श करना रहा। कॉन्फ्रेंस के द्वितीय दिवस का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना एवं विश्वविद्यालय कुलगीत के साथ हुआ। द्वितीय दिवस की शुरुआत तृतीय की-नोट व्याख्यान से हुई, जिसमें प्रो. (डॉ.) राम गोपाल ने नैनो विज्ञान एवं ग्रीन केमिस्ट्री के उभरते अनुसंधान क्षेत्रों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसके पश्चात आयोजित आमंत्रित व्याख्यानों में प्रो. (डॉ.) सोग़रा खबनादीदेह, प्रो. (डॉ.) हिमांशु जोशी, प्रो. (डॉ.) अभिषेक चौहान एवं डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने फार्मास्यूटिकल, कृषि, पर्यावरण तथा स्वास्थ्य विज्ञान से जुड़े नवीन शोध कार्यों एवं उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर अपने विचार साझा किए। कांफ्रेंस के तकनीकी सत्र-III के अंतर्गत शोध पत्र वाचन सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं देशों से आए शोधार्थियों ने नैनोमैटीरियल्स, जल शोधन, नैनो-फर्टिलाइज़र, रोग नियंत्रण, कंप्यूटेशनल मॉडलिंग एवं सतत कृषि जैसे विषयों पर अपने शोध निष्कर्ष प्रस्तुत किए। वहीं तकनीकी सत्र-IV के अंतर्गत पोस्टर प्रस्तुति सत्र आयोजित किया गया, जिसमें युवा शोधार्थियों ने नवाचार आधारित शोध कार्यों का प्रभावी प्रदर्शन किया। समापन सत्र में आयोजन सचिव एवं रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. हरीश सारस्वत ने सम्मेलन प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि सम्मेलन के दौरान देश-विदेश से आए शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों द्वारा 60 से अधिक शोध पत्र एवं पोस्टर प्रस्तुत किए गए। इन प्रस्तुतियों में नैनो टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, ग्रीन केमिस्ट्री, फार्मास्यूटिकल, पर्यावरण एवं हेल्थकेयर से जुड़े समसामयिक एवं उपयोगी शोध विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। कुलपति प्रो. आलोक मिश्रा ने अपने संबोधन में प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों में शोध पत्र लेखन एवं प्रस्तुतीकरण कौशल के प्रति गंभीरता स्पष्ट रूप से दिखाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शोध, समाज और नीति के बीच सेतु का कार्य करते हैं तथा सतत विकास तभी संभव है जब तकनीकी प्रगति के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व दिया जाए।
मेवाड़ एजुकेशन सोसायटी के अध्यक्ष गोविंद लाल गदिया ने अपने उद्बोधन में देश-विदेश से पधारे विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए सम्मेलन की भव्य सफलता पर शुभकामनाएँ एवं आभार व्यक्त किया। विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष विज्ञान मेला एवं जॉब फेयर का आयोजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान का वास्तविक विकास तभी सार्थक है जब वह समस्त प्राणियों के हित में हो। खेजड़ी आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने उद्योग स्थापना से पूर्व पर्यावरणीय प्रभावों पर विचार करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी के माध्यम से कोरोना जैसी वैश्विक महामारी पर विजय प्राप्त की है, जिसके लिए बायोटेक्नोलॉजी वैज्ञानिकों का योगदान अतुलनीय है। उन्होंने वैज्ञानिकों एवं शिक्षकों को समाज का रक्षक बताते हुए उन्हें नमन किया। इस अवसर पर नीरज कुमार फ्लोरिया ने मैग्नेटो थैरेपी पर अपने विचार साझा किए तथा भविष्य में ऐसे और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के आयोजन की आवश्यकता पर जोर दिया। समापन सत्र में मुख्य अतिथि द्वारा उत्कृष्ट शोध पत्र एवं पोस्टर प्रस्तुतियों के लिए प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इससे पूर्व विशेषज्ञों ने युवा शोधार्थियों को अपने अनुसंधान कार्यों को समाजोपयोगी एवं व्यावहारिक दिशा में आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। मेवाड़ विश्वविद्यालय के डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. दीप्ति शास्त्री ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। सम्मेलन ने बहुविषयक शोध, वैश्विक सहयोग एवं नवाचार को सशक्त मंच प्रदान करते हुए मेवाड़ विश्वविद्यालय की अकादमिक एवं अनुसंधान गतिविधियों को नई दिशा दी।
कार्यक्रम में रजिस्ट्रार डॉ. चंडीकादित्य कुमावत, डीन एकेडमिक्स प्रो. दीपक व्यास, डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. दीप्ति शास्त्री, रिसर्च डायरेक्टर डॉ. विनेश अग्रवाल, विभिन्न संकायाध्यक्ष, निदेशक, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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